| रचना2 :- |
शहीद वीर नारायण
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छत्तीसगढ़ के माटी बँदव,
भुँइया सोनाखान हे ।
जिहा जनमीन वीर नारायण,
दीन अपन बलिदान हे।
छत्तीसगढ़ के स्वाभिमानी बेटा,
लड़िस छाती तान के।
फिरंगी ले कभु नइ डरीस,
वीर राजा सोनाखान के।
अंकाल के दिन म संगी,
जनता भुखन मरत सहय।
राज खज़ाना के सबो,
दाना घलो बटागे रहय।
सेठ ले विनती करिस,
देदे तोर गोदाम के दाना।
बाड़ही सहित चुका देहु,
नई रखहूँ एको आना।
ओ निर्दयी सेठ म संगी,
थोरको दया नइ जगिस।
लोग लइका के भूख ल,
नारायण देखन लागिस।
कुछु चारा नइ दिखिस त,
सेठ के अन्न ल बटवइस।
ओ बईमान सेठ ह जाके,
फिरंगी मनला बतइस।
वीर नारायण ल पकड़े के,
मउका खोजत रहिन पागे।
चोरी के मुकदमा चलाके,
फाँसी के सज़ा सुनागे।
दस दिसम्बर 1857के,
गाँव घर म मातम छागे।
जय स्तंभ चौक म वीर,
नारायण ल फाँसी लगागे।
वीर बहादुर बेटा ल,
थोरको डर नइ आइस।
छत्तीसगढ़ के बघवा बेटा,
पहिली शहीद कहाइस।
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चिन्ता राम धुर्वे |