लिंगागिरि विद्रोह १८५६ ई.
• नेतृत्व- धुरवा राव माडिया (दूसरा शहीद)
• शासक- भैरमदेव
• उद्देश्य - बस्तर का मुक्ति संग्राम
लिंगागिरि आदिवासी विद्रोह ( १८५६ ई. ) ब्रिटिश शत्ता के खिलाफ किया गया था। यह एक सशस्त्र विद्रोह था जिसे भोपालपट्टनम जमींदार क्षेत्र के लिंगागिरी तालुका के तालुकेदार धुरवा राव ने नेतृत्व किया था।
३ मार्च १८५६ ई. को धुरवा राव और अग्रेजो के सैनिको के बिच चिंतलवार में युद्ध हुआ जिसमे धुरवा राव पकड़ा गया और ५ मार्च १८५६ ई. को उसे फांसी दे दी गई।