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रेवा रानी की गाथा

रेवा रानी सखियो के साथ तालाब में नहाने जाना चाहति, राजा उग्रसेन उसे सखियों के साथ तालाब जाने देता। रेवा रानी नहाने जाती है। सात सखियाँ आगे आगे और सात सखियाँ पीछे पीछे जाती है। तालाब के पास एक बगीचे में रानी थोड़ी देर के लिए रुकती है। सभी सखियाँ तभी पीछे रह गई थी। उस बगीचे में दुमदुमी निशाचर राजा उग्रसेन का रुप धारन कर रानी के पास आता है और अपना काम इच्छा व्यक्त करता है। रानी रेवा को बहुत ही गुस्सा आता है और वह राजा को वापस जाने के लिए कहती है। दुमदुमी निशाचर पेड़ उखाड़कर फेंकने लगता है। ये देखकर रेवा रानी समझ जाती है कि वह कौन है। अचानक चारों ओर अंधेरा हो जाता है। और वह निशाचर अपनी इच्छापूर्ति करता है। अब रानी उसे शाप देने लगती है। तब निशाचर कहता है कि तेरा पुत्र अपनी शक्ति से दुनिया को हिला देगा। और वह निशाचर अदृश्य हो जाता है। रानी की सखियाँ उस वक्त उनके पास आती है तो रानी कहती है कि बन्दरों ने उसकी ये हालात की। बाद में रानी एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम केशराज रक्खा जाता। इस कहानी में नारी को असहाय दिखाया गया है। जब मुख बोले पवन रेवा रानी सुन राजा मोर बात हो लाल बड़ दिन होइगे मोला सगरी देखे बेर सगरी नहाय के मोला साध होगे हो ला फुलहा तो देखत बिधुन भइगे रानी चिरई अऊ चिरगुन पग पंछी देखथे पांवे पड़थो मोला छोड़ो महाराज

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